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"पाठशाला" जीवनरूपी ये "पाठशाला" भी सच कितनी अजीब है, बिन किताबों के ही अनुभवों से भरी डिग्रियों की भीड़ है। किसी कक्ष में उज्जवल भविष्य की उम्मीद है, तो कही नाकामबियों ...